परिचय:
राजा जयचंद्र (या जयचंद) गहड़वाल वंश के एक प्रसिद्ध राजा थे, जिनका शासन कन्नौज (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में था। उनका शासनकाल 12वीं शताब्दी में था और वे एक शक्तिशाली शासक माने जाते थे। इतिहास में उनका नाम खासकर पृथ्वीराज चौहान से विरोध और मोहम्मद गौरी के समय की घटनाओं से जुड़ा है।

कहानी: राजा जयचंद्र और पृथ्वीराज चौहान
राजा जयचंद्र और पृथ्वीराज चौहान दोनों ही शक्तिशाली हिन्दू राजा थे। लेकिन इनके बीच राजनैतिक प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत दुश्मनी थी।

1. स्वयंवर की घटना:
कहते हैं कि जयचंद्र ने अपनी पुत्री संयोगिता का स्वयंवर रखा। पृथ्वीराज को आमंत्रित नहीं किया गया क्योंकि जयचंद्र उनसे नाराज़ थे। परंतु, संयोगिता पृथ्वीराज से प्रेम करती थी।
स्वयंवर के दिन पृथ्वीराज चुपचाप वहां पहुँचे और संयोगिता ने वरमाला उन्हीं को डाल दी। इसके बाद पृथ्वीराज संयोगिता को अपने साथ लेकर चले गए। इस घटना से जयचंद्र अत्यंत क्रोधित हुआ और उसने पृथ्वीराज से वैर पाल लिया।
2. मोहम्मद गौरी से संपर्क (लोककथा):
कुछ लोककथाओं के अनुसार, जयचंद्र ने पृथ्वीराज से बदला लेने के लिए मोहम्मद गौरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया।
हालांकि, इतिहासकारों में इस पर मतभेद है और कई इसे बाद की गाथाओं का हिस्सा मानते हैं।

3. जयचंद्र का अंत:
1194 ई. में मोहम्मद गौरी ने चंदावर के युद्ध में जयचंद्र को हराया। इस युद्ध में जयचंद्र मारे गए और कन्नौज पर मुस्लिम शासन का कब्ज़ा हो गया।
जयचंद्र: गद्दार या गलत समझा गया?
इतिहास में “गद्दार जयचंद” की छवि बहुत चर्चित है, लेकिन यह पूर्ण सत्य नहीं है।
कई आधुनिक इतिहासकार मानते हैं कि जयचंद्र एक वीर और सक्षम शासक थे, लेकिन बाद की लोकगाथाओं और कविताओं ने उन्हें एक विवादित पात्र बना दिया।
निष्कर्ष:
राजा जयचंद्र का जीवन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण और विवादित अध्याय है। वे एक शक्तिशाली राजा, एक पिता, और एक इंसान थे, जिनके निर्णयों और घटनाओं ने उन्हें इतिहास और लोककथाओं में अमर कर दिया।
- Apna kannaujhttps://kannaujnews.com/



